साहित्य

नव संवत्सर: इस बार ऐसे आना

सुखमिला अग्रवाल'भूमिजा'

नवल इस वर्ष में सबका करें जी भर के अभिनन्दन।
रहे सुख-शांति घर सबके करें भगवान का वंदन।।

भरा उल्लास हो सबके दिलों में प्रेम बसता हो।
हृदय आलोक मय संसार का उपवन बने चंदन।।

सभी की पूर्ण हों आशा निराशा नष्ट हो जाए।
सपन साकार हो जाएं नयन के द्वार बन पावन।।

क्षमा सत् शील का हो वास प्राणी मात्र के मन में।
शिवाला एक बन जाए हृदय का धाम मनभावन।

रहे सहयोग की सबके मनों में भावना गहरी।
अटल विश्वास का बरसे घरों में प्रेम का सावन।।

बुजुर्गों के लिए सम्वेदनाएं भावनाएं हों।
करें सम्मान उनका हर घड़ी कर शीश पदवंदन।

नवल इस वर्ष में अरदास यह ‘सुखमिला’ करती।
चरण छू के चलो घर से करो माँ-बाप का वंदन।।

सुखमिला अग्रवाल’भूमिजा’
©️®️ स्वरचित मौलिक
मुंबई

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