
नाम था जिनका भगत सिंह वीरों के थे वीर।
देश के अभिमान, मिट्टी की खुशबू में बसे, हर दिल की थे पहचान।।
मौत को गले लगाया जिसने, आजादी का दीप जलाया।
कर दी जवानी देश के नाम ऐसे थे भारत माँ के वीर सपूत ।।
“इंकलाब” की गूंज से, गगन भी थर्राया था।
देश के युवाओं के दिल में साहस का दीप जलाया था।।
फांसी का फंदा भी जिसे झुका ना सका ऐसे थे वीर जवान ।
मातृभूमि की खातिर करदी अपनी जीवन भी कुर्बान।।
साहस और बलिदान की गाथा युगों युगों तक गाई जाएगी।
शहीद दिवस पर भारत मां उन के वीर सपूतों को फिर से नमन की जायेगी।।
जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳
©स्वरचित मौलिक रचना
तृषा सिंह
देवघर, झारखंड


