सिडनी में गूंजा बिहारी स्वाभिमान एवं अस्मिता का स्वर, प्रथम अंतरराष्ट्रीय बिहार गौरव सम्मान से सम्मानित हुए कवि संजीव मुकेश


-रिपोर्ट दुर्गेश मोहन
पटना। बिहार दिवस के अवसर पर भारत से बतौर विशेष अतिथि आमंत्रित किए गए कवि संजीव मुकेश को प्रथम अंतरराष्ट्रीय बिहार गौरव सम्मान 2026 प्रदान किया गया।यह सम्मान कवि मुकेश को बिहारी अस्मिता और आत्मगौरव को निरंतर अपनी रचनाओं के माध्यम से युवाओं में जागृति और आत्मसम्मान उत्पन्न करने के सार्थक प्रयास हेतु प्रदान किया गया है।कवि मुकेश के सम्मान की घोषणा नियाड ग्रुप के चेयरमैन प्रवीण कुमार ने किया।सम्मान में सिडनी का प्रसिद्ध अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न एवं 2.51 लाख (दो लाख इक्यावन हजार) की राशि प्रदान की गई। सम्मान बिहार झारखण्ड कम्युनिटी ऑस्ट्रेलिया के पदाधिकारी नीता कुमारी, श्वेता, प्रवीण कुमार, कॉन्सुलेट जनरल डॉ एस जानकीरमण, डिप्टी कॉन्सुलेट जनरल नीरव सुतरिया द्वारा प्रदान किया गया।

इस अवसर पर कवि संजीव मुकेश ने अपनी कई प्रसिद्ध कविताओं का पाठ किया। उन्होंने गाँव और बिहार की खुशबू को सिडनी में बिखेरा। श्रम-मेधा की फुलवारी हैं, चाणक्य चेतनाधारी हैं, पर्वत का सीना चीर दिया हम भैया एक बिहारी हैं।बिहार के गौरव और स्वाभिमान को जोड़ते हुए उन्होंने पढ़ा…
हम वैशाली हैं, मगध हैं, जनक दुलारी हैं
हम बुद्ध, महावीर, दिनकर पर बलिहारी हैं ।
हम चीर के सीना पर्वत का बढ़ जाते हैं;
हाँ! हाँ!!! भईया सच समझे, यार बिहारी हैं।
प्रवासियों के लिए उन्होंने ये पंक्तियां पढ़ी-
भाव से मिलते हाथ-हाथ तो नमस्कार हो जाते हैं ,
शनैः _शनैः चलते हैं हम, फिर दुनिया में छा जाते हैं ।
हम “प्रवासी” रहते अपनी मिट्टी से थोड़ी दूर मगर;
रग-रग में बसता भारत, पल-पल बिहार को गाते हैं।आप नालंदा जिला के रहने वाले हैं। आपके पिता उमेश प्रसाद हैं। । मुकेश जी मगही एवं हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु जन जागृति अभियान भी चला रहे हैं। इनके गाए व लिखे गीत ‘यही तो मेरा देश है’ और ‘चलें!हम प्रेरित करें बिहार’ काफी चर्चित रहा है। गाँव का लड़का नाम से प्रसिद्ध संजीव मुकेश हिन्दी कविता का जाना-पहचाना और चमकता चेहरा है। इनकी रचनाएं संस्कारों की बात करती हैं। अपनी रचनाओं से युवाओं में जन चेतना जागृत करने वाले मुकेश हिन्दी के साथ-साथ मगही में भी खूब लिखते हैं। मगही पान की तरह उनकी कविता की मिठास अंतः मन तक घुल जाती है। संजीव मुकेश ने कई राष्ट्रीय चैनलों पर लगातार काव्य पाठ भी करते रहे हैं। इन्होंने ज़ी न्यूज़, भारत एक्सप्रेस, साहित्य तक, दूरदर्शन, राष्ट्रीय सहारा, न्यूज़ 18, लाइव टाइम्स, भारत 24, CNBC आवाज़, IBC24 सहित अनेक प्रतिष्ठित चैनलों पर कई बार अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं।आईआईटी पटना, आईसीसीआर-पटना, सीएसआईआर-आईआईएमटी भुवनेश्वर, आईसीएआर नयी दिल्ली, केसरिया महोत्सव, थावे महोत्सव, सिंहेश्वर महोत्सव सहित कई देश के प्रमुख संस्थान एवं सांस्कृतिक उत्सव में अपनी काव्य प्रस्तुति दी है। संजीव मुकेश ने कई संस्थानों के लिए गीत भी लिखें हैं।
श्री मुकेश को अनेक साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्थानों ने सम्मानित किया है। जिसमें
विद्या विकास सम्मान 2014, पटना
मगही कबीर मथुरा प्रसाद नवीन साहित्य सम्मान 2015, नालन्दा
महाकवि योगेश्वर प्र0 सिंह योगेश साहित्य सम्मान 2016, नालन्दा आदि है।
संजीव मुकेश का देशभक्ति गीत ‘यही तो मेरा देश है’ का प्रसारण गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या 25 जनवरी 2024 को रात्रि 10 बजे से आकाशवाणी के सभी नेटवर्क पर 22 भारतीय भाषाओं में अनुदित कर प्रसारित किया जा चुका है।हमें इन पर गर्व है।
प्रस्तुति _दुर्गेश मोहन
बिहटा, पटना, बिहार (भारत)




