
सिलेंडर महँगा हो गया, मम्मी की आँखें नम,
बिल देखकर बोलीं, “अरे बेटा, अब क्या दम?”
रसोई में देखो अब सब घबरा पड़े,
चूल्हे के पास हर कोई सिर पकड़ पड़े।
गैस की बचत का नया झमेला,
रसोई में अब बस फल का मेला।
सिलेंडर का बिल आया, दिल हुआ फट,
फल खाते-खाते बोला, “अरे यार, ये क्या घट?”
चाय भी अब बनती है दिन में बस एक बार,
वरना गैस बोले — “इतना जलाओगे तो हो जाऊँगी फरार!”
मम्मी बोलीं, “अब सब नियम निभाओ,
भूख लगे तो एक टाइम पानी पीकर काम चलाओ!”
पापा बोले — “अरे आज ज़रा पकौड़े और समोसे बना दो प्यारे,”
सिलेंडर बोला — “धीरे जलाओ, मैं भी हूँ बेचारा!”
इतना जलाओगे तो महीने से पहले हो जाऊँगा लापता दोबारा,
फिर रसोई में ढूँढते फिरोगे — “कहाँ गया हमारा सहारा!” 😄
रंजीता निनामा
झाबुआ, मध्य प्रदेश




