साहित्य

विश्व जल दिवस

आशा बिसारिया

न करना जल को तुम बर्बाद
जल सेही जीवन मिलता है,इतना रखना याद
न……
जल-स्तर घटता जाता है
ध्यान मनुज को कबआता है
सबमर्सिबल पम्प के जैसे ,यंत्र किए ईजाद
न…….
सूखे-सूखे ताल तलैंयां
प्यासे पंछी,प्यासी गैयां
तृषित लोचनों से देखें हैं ,करते हैं फरियाद
न……
जल संरक्षण विधि अपनाओ
जगह- जगह पर पेड़ लगाओ
घटा घिरेगी,बारिश होगी , गूँजेगा घननाद
न…….
पुरखों ने नदी ,बाबड़ी देखी
बाबा ने नल – कुंईयांँ देखी
भावी पीढ़ी को दे न पाओगे,तुम जल की सौगात
न……..
आशा बिसारिया चंदौसी
जिला-संभल,उत्तर प्रदेश

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