
गणपति बप्पा गजानंद,
करो हृदय में तुम आनंद।
वक्रतुंड विघ्नों के हारी,
तुमसे ही दुनिया उजियारी।
लंबोदर करुणा के सागर,
भक्तों के तुम हो हितकार।
मूषक वाहन साथ तुम्हारा,
सिद्धि-बुद्धि का तुम उजियारा।
मंगलमूर्ति दीन दयाला,
हरो कष्ट, रखो खुशहाला।
शुभ-लाभ के दाता तुम हो,
हर संकट के त्राता तुम हो।
मोदक प्रिय मन भावन प्यारे,
नाम तुम्हारा संकट टारे।
प्रथम पूज्य जग के स्वामी,
भक्तों के तुम अंतर्यामी।
गाओ मिलकर जय जयकार,
गजानंद की महिमा अपार।
कर दो जीवन सफल हमारा,
रहे सदा आशीष तुम्हारा।
संकटमोचन की महिमा
जय बजरंगबली, बल के सागर,
भक्ति में डूबा हर एक जागर।
राम नाम के तुम हो ध्यानी,
सीता-राम के सच्चे स्वामी।
अंजनी के लाल, पवनसुत वीर,
दूर करो तुम हर दुख-पीर।
सागर लाँघ लंका पहुँचाए,
रामदूत बन विजय दिलाए।
सिंदूर रंग में छवि सुहानी,
भक्तों पर करते कृपा रवानी।
गदा उठाए दुष्ट संहारे,
धर्म की राह सदा तुम सँवारे।
संकटमोचन नाम तुम्हारा,
हर लेता दुख सारा-सारा।
जिसने तुमको हृदय बसाया,
जीवन में सुख-दीप जलाया।
हनुमान जयंती का पावन दिन,
भर दे मन में नव आचरण-चिन्ह।
राम भक्ति की ज्योति जलाएँ,
हनुमत चरणों में शीश झुकाएँ।
जय हनुमंत, जय वीर महान,
करो कृपा, रखो सबका मान॥
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार


