साहित्य

म्हारे हनुमान

रिया राणावत

म्हारे हनुमान नि रथ सवारी,
देखें बाल–बच्चे ओर नर – नारी।
हनुमान हैं वीरों के वीर ,
डर भागे उनसे सब आततायी ।

हनुमत जो नाम जपे ,
वो है सबसे धीर ।
मन में श्रद्धा से करते पाठ,
हनुमत रहे हमेशा पास ।

भूतों को भी दूर भगाएं ,
मन में वीरता वो बढ़ाए ।
सबसे बलधारी आयेंगे ,
मेरे वीरों के वीर कहलाएंगे ।

राज पाठ ना वो चाहते ,
अपने राम के भजा सुनते।
सिया राम को हृदय में बसाते,
रोज राम का पाठ नमाते।

सबके संकट को हर कर जाते ,
रोज नहीं पीढ़ा को दूर भागते ।
संयम से वो उमंग भर लाते ,
अटक काम भी पूरे करते ।

– रिया राणावत
कालीदेवी, झाबुआ(मध्य प्रदेश)

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