साहित्य

परिंदे और शिकारी

संगीता वर्मा

एक शिकारी परिंदो के लिए जाल बिछा गया अपनी लालच में, जाल के नीचे दाना बिखेर दिये बैठ गया उनके इंतजार में।

फंस गए कुछ परिंदे यूं एतबार में लुट गये हैं, शिकारी के इस जाल में,फंस गए कुछ परिंदे यूं एतबार में।

जानें क्या होगा इनका खुदा जानता छल-कपट से परे है नहीं जानता,फंस गए कुछ परिंदे यूं एतबार में।

सिर्फ दानों को देखा नहीं जाल को भांप पाये नहीं ऐसे जंजाल,
शिकारी की चलाकियों को फंस गये कुछ परिंदे यूँ एतबार में।

खुश हुआ है शिकारी परिंदों के फंस जाने पर अपनी चाल में,भी हैरां भी है उड़ गए परिंदे लिए जाल को।

एकता से बड़ी कोई साजिश नहीं उड़ चुके हैं,परिंदे लिए जाल को फंस गए कुछ परिंदे यूं एतबार में।

लुट गये हैं शिकारी के इस जाल में देखते रह गया शिकारी इनकी एकता फंस गए कुछ परिंदे यूं एतबार में।

संगीता वर्मा
कनपुर उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!