
हिंदी मात्र एक भाषा नहीं
यह भावों की अभिव्यक्ति है
मैत्री की यह डोर है
उर में बसी आसक्ति है!
विश्व मंच पर विराज रही
बनी यह जन संपर्क भाषा
प्रचार-प्रसार करें मिलकर
बने आम जनों की भाषा!
साहित्य मनीषियों को नमन
समृद्ध किया भाषा का रूप
हम भी दें सेवाएं अपनी
नित-नित निखरे स्वरूप!
निज भाषा पर गर्व हमें
यह जननी सम पूजनीय
हम इसके माध्यम से जुड़े
हिंद वासियों की अति प्रिय!
हिंदी का गौरव गान करें
हिंदी पर अभिमान करें
दूर-सुदूर तक पहुंचाएं
हिंदी का नित सम्मान करें!
मीना जैन इंदिरापुरम गाजियाबाद।




