
इस तरह रूठ कर ना जाया करो,
इतनी जल्दी हो तो ना आया करो।
चार दिन की जिंदगी मस्ती से कटे,
किसी को कभी ना सताया करो।
हसीन दुनिया है लोग सातिर यहाँ,
हर किसी से प्रेम ना बढ़ाया करो।
हुस्न खुदा ने बख्शा तो कद्र करो,
अपने चहेतो को ना रूलाया करो।
हुस्न सदा बरकरार रहती कहाँ,
ए हकीकत को ना भुलाया करो।
शरीफों से धरा खाली तो नहीं,
आजमा मुजरिम ना बनाया करो।
भुलक्कड़ रिश्तों की पूजा करता,
मिले जख्म को ना छुपाया करो।
भुलक्कड़ बनारसी




