आलेख

मरहटा मुक्तक यमुना तट उपवन, विचरें व्रज-धन, संग रोहिणी लाल। श्री वत्स अँके हिय, खिलें जीव जिय, भक्ति भाव हर भाल।। पीताम्बर अनुपम,पूर्ण कला सम, अनिल तंतु गतिमान- सिर पाछिल अलकें, कुंचित झमकें,मुग्ध साँझ सरि ताल।। मीरा भारती।

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