
लौटी फिर 26 जनवरी
याद दिलाने आई, याद दिलाने आई।
भारत माँ के सपूत थे जो
आजादी के थे परवाने,
सर्वस्व त्याग देशहित में
चल पड़े थे शीश कटने,
उन मस्त मलंगों की हमको
फिर याद दिलाने आई
लौटी……..
भारत भूमी थी उनको तो
अपनी जां से भी प्यारी,
उनके खूं से ही महक रही
कश्मीरी केसर की क्यारी,
सीमा पर थे चटटान बने
तूफ़ा बर्फीली राहों में,
उन वीरों की शौर्य गाथा
फिर याद दिलाने आई,
लौटी…….
आकंठ ऋणी हैं हम उनके
जिनकी लाशें ही आई हैं,
भारत की लाज बचाने को
गोलियां जिन्होंने खाई हैं,
है देश ऋणी उस माता का
जो शहीद की माँ कहलाई है
पीकर आँसू है दिया कांधा,
ये याद दिलाने आई,
लौटी फिर26 जनवरी
याद……..
©® सुमन पंत ’सुरभि’
#गणतंत्रदिवस




