साहित्य
हमारे रितुल के नाम (माँ–पापा)

हमारे रितुल के नाम
(माँ–पापा)
जब तुम आए हमारे जीवन में,
घर ने दिल से साँस ली।
हँसी ने रास्ता ढूँढ लिया,
और ख़ुशी ने आँखें खोल लीं।
रितुल, तुम हमारी सुबह हो,
और हर शाम की राहत हो।
तुम्हारे एक “मम्मी–पापा” में,
पूरी दुनिया की चाहत हो।
माँ कहती है—
तू जैसा है, वैसा ही सबसे सुंदर है।
पापा कहते हैं—
तू जैसा बनेगा, उस पर मुझे गर्व होगा।
हम दोनों की बस एक दुआ है,
तू अच्छा इंसान बने।
सच बोले, दया रखे,
और हर दिल को अपना माने।
अगर कभी ठोकर लगे,
तो हमारी बाहें हैं।
और जब तू उड़ना चाहे,
तो हमारी दुआएँ हैं।
तीन साल का हो रहा है तू आज,
पर हमारे लिए तू हर उम्र की खुशी है।
जन्मदिन मुबारक हो हमारे बेटे,
रितुल पाठक—
तू हमारा सबसे सुंदर सच है।
अतुल पाठक
हाथरस(उत्तर प्रदेश)



