साहित्य

जैसा अपराध वैसा दंड आलेख

जयचन्द प्रजापति

देश में बढ़ रहे अपराध से लोगों में आक्रोश है। गुस्सा है। राजस्थान की घटना ने तो लोगों की आत्मा को हिला कर रख दिया है। हम देश के राष्ट्रपति महोदया से अनुरोध करते हैं कि ऐसा प्राविधान हो, जो जैसा अपराध करे उसको उसी प्रकार का दंड दिया जाये।

 

अगर किसी ने किसी की अंगुली काटा है तो दंड में प्राविधान हो कि उसकी भी अंगुली काटी जाये। कोई किसी के सिर पर वार किया है तो उसके बदले उसके भी सिर पर वार किया जाये। जो किसी की हत्या करता है। जिस हथियार से जैसे करता है। उसी हथियार से उसकी भी हत्या की जाये।

 

बलात्कारियों को लिंगहीन कर दिया जाये और उनका खाना पानी बंद कर दिया जाये। नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म तथा हत्या करने वालों को आम जनता को सौंप दिया जाना चाहिए या पीड़ित परिवार को सौंप दिया जाये। वह चाहे जिस तरह से दंड देना चाहे दें।

 

अपराध करने वाले फांसी तथा जेल की सजा एक हवा की तरह समझ रहे हैं। इन्हें कोई डर नहीं। इन हैवानों को कोई खौफ नहीं। कानूनों से इन्हें डर ही नहीं लगता। सख्त कानून बनाया जाना चाहिए ताकि कोई अपराध करने से पहले उसकी आत्मा हिल जाये।

 

अबोध बच्चियों ,महिलाओं, नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को आम जनता के सामने प्रस्तुत कर दिया जाना चाहिए। खुले में दंड दिये जाने की व्यवस्था हो ताकि समाज में यह संदेश जाये कि इस तरह से गलत करने वाले के साथ इसी तरह का व्यवहार किया जायेगा।

 

भारत सरकार से अपील करता हूँ कि जल्द से जल्द कानून बनाये और आदेश देकर राजस्थान की बेटी के लिए इन कुकर्मियों को आम जनता के सामने इनका ठीक से सम्मानित किया जाये और फलाहार की भी व्यवस्था की जाये।

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जयचन्द प्रजापति ‘जय’

प्रयागराज

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