बिहार

अभावों से उठकर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को दे रहे नई दिशा, संघर्ष और समर्पण की मिसाल बने शिक्षक एस.पी. यादव

Inspirational journey of Sp Yadav Sir Written by Kumar Sandeep

मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड अंतर्गत करैला गांव के युवा शिक्षक एस.पी. यादव आज ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। अत्यंत साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने यह साबित किया है कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की सफलता में बाधा नहीं बनतीं, यदि उसके भीतर सीखने की ललक, दृढ़ इच्छाशक्ति और समाज के प्रति समर्पण का भाव हो।

20 अक्टूबर 1998 को करैला गांव में जन्मे एस.पी. यादव के पिता उमेश राय वर्षों तक परिवार के भरण-पोषण के लिए रिक्शा चलाने के साथ-साथ बांस की खरीद-बिक्री का कार्य करते रहे। वर्तमान में भी वे बांस के व्यवसाय से जुड़े हैं। उनकी माता सुशीला देवी ने सीमित संसाधनों के बीच परिवार का पालन-पोषण करते हुए बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। आर्थिक अभावों के बावजूद माता-पिता ने कभी बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं किया।

बचपन से संघर्षों का सामना

एस.पी. यादव की प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय करैला में हुई। इसके बाद उन्होंने मध्य विद्यालय विशनपुर मेहसी तथा श्री मोहन उच्च विद्यालय, सिमरा से माध्यमिक शिक्षा पूरी की। बचपन में वे पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियां भी निभाते थे। दुधारू पशुओं के लिए खेतों से घास काटकर लाना उनकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा था।

दसवीं के बाद उनका सपना विज्ञान संकाय में पढ़ने का था, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों और सामाजिक परिस्थितियों के कारण वे विज्ञान विषय में नामांकन नहीं ले सके। वर्ष 2013 में उन्होंने रामदयालु सिंह महाविद्यालय में कला संकाय से स्नातक की पढ़ाई प्रारंभ की और बाद में इतिहास विषय में स्नातक तथा स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

ट्यूशन से शुरू हुआ शिक्षण का सफर

आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने दसवीं कक्षा के बाद ही छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। उनकी सरल शिक्षण शैली, अनुशासन और विद्यार्थियों के प्रति आत्मीय व्यवहार के कारण धीरे-धीरे विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती गई। पढ़ाई के साथ-साथ वे लगातार अध्यापन भी करते रहे।

कला संकाय से पढ़कर विज्ञान के लोकप्रिय शिक्षक बने

उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब गांव के विद्यार्थियों और अभिभावकों ने उनसे विज्ञान संकाय के छात्रों को पढ़ाने का आग्रह किया। प्रारंभ में उन्होंने स्वयं को इस चुनौती के लिए तैयार नहीं माना, लेकिन हार मानने के बजाय उन्होंने विज्ञान विषयों का गहन स्व-अध्ययन शुरू किया।

उन्होंने आधुनिक ऑनलाइन शैक्षणिक माध्यमों की सहायता से लगातार अध्ययन किया और वर्ष 2020 से विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को भी पढ़ाना प्रारंभ किया। शुरुआत में कई लोगों ने उनकी आलोचना की और कहा कि कला संकाय से पढ़ा शिक्षक विज्ञान कैसे पढ़ा सकता है। लेकिन उन्होंने अपने ज्ञान, मेहनत और विद्यार्थियों के उत्कृष्ट परिणामों के माध्यम से इन सभी सवालों का जवाब दिया।

ग्रामीण शिक्षा को बनाया जीवन का लक्ष्य

वर्ष 2022 में उन्होंने Education by SP Yadav नाम से यूट्यूब चैनल शुरू किया। इसके माध्यम से वे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचा रहे हैं। वर्तमान में वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों विद्यार्थियों को न्यूनतम शुल्क पर शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि अनेक आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को निःशुल्क पढ़ाते हैं।

बड़े संस्थानों के प्रस्ताव ठुकराए

शिक्षण के क्षेत्र में उनकी बढ़ती लोकप्रियता और विषय पर मजबूत पकड़ को देखते हुए प्रतिष्ठित शैक्षणिक मंचों Physics Wallah, Disha Online Classes, Target Board तथा Science संग्रह से भी उन्हें अध्यापन के प्रस्ताव प्राप्त हुए। हालांकि उन्होंने इन अवसरों को स्वीकार करने के बजाय अपने गांव और क्षेत्र के विद्यार्थियों के बीच रहकर शिक्षा का दीप जलाने का निर्णय लिया।

उनका मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन मिले, तो वे भी किसी बड़े शहर के विद्यार्थियों से कम नहीं हैं।

मां के शब्द बने सबसे बड़ी प्रेरणा

एस.पी. यादव बताते हैं कि बचपन में जब वे कॉपी-किताब खरीदने के लिए पैसे मांगते थे, तब उनकी मां कहती थीं, “बेटा, चिंता मत कर… पापा बांस बेचकर आएंगे, तब तुम्हारी कॉपी-किताब जरूर खरीद देंगे।” यही शब्द आगे चलकर उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बने और उन्होंने ठान लिया कि आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बनने देंगे।

छात्रवृत्ति योजना का सपना

एस.पी. यादव का सपना है कि भविष्य में आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजना शुरू की जाए, ताकि कोई भी प्रतिभाशाली छात्र केवल आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रह जाए।

वे अपने विद्यार्थियों से हमेशा कहते हैं—
“मन लगाकर पढ़ो, इतिहास रचो और अपने माता-पिता के त्याग, संघर्ष और सपनों का सम्मान करते हुए ऐसा जीवन जियो, जिस पर उन्हें गर्व हो।”

प्रेरणा का पर्याय बने एस.पी. यादव

एस.पी. यादव का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सफलता संसाधनों से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम, सीखने की इच्छा और समाज के प्रति समर्पण से प्राप्त होती है। एक रिक्शा चालक और बांस व्यवसायी के पुत्र से लेकर सैकड़ों विद्यार्थियों के प्रेरणास्रोत शिक्षक बनने तक की उनकी यात्रा आज ग्रामीण युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

रिपोर्ट : कुमार संदीप
ग्राम–सिमरा, पोस्ट–श्रीकांत, प्रखंड–बंदरा, जिला–मुजफ्फरपुर (बिहार)

Kumar Sandeep

बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिला अंतर्गत सिमरा गांव का एक सामान्य परिवार में जन्मा एक युवा साहित्यकार, विद्यार्थियों का गुरू, व अपने अभिभावक का संस्कारी संतान।

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