बिहार

देवर्षि नारद सत्य, तर्क और न्याय के प्रथम अधिवक्ता

कुमुद रंजन सिंह

नालंदा।

प्रख्यात समाजसेवी एवं अधिवक्ता कुमुद रंजन सिंह ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में देवर्षि नारद मुनि को ब्रह्मांड का प्रथम अधिवक्ता माना गया है। उन्होंने कहा कि वकालत केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा की सतत साधना है।

अधिवक्ता सिंह ने बताया कि देवर्षि नारद अपने तर्क, संवाद और निर्भीक प्रश्नों के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध खड़े होते थे। उन्होंने सत्ता, पद या भय के आगे सत्य से कभी समझौता नहीं किया। यही कारण है कि नारद मुनि को न्याय और विवेक का प्रतीक माना जाता है।

उन्होंने कहा कि नारद स्मृति भारतीय न्याय परंपरा का महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें न्याय, दंड, साक्ष्य और न्यायाधीश के कर्तव्यों का विस्तार से वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ स्पष्ट करता है कि कानून का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि समाज में संतुलन और नैतिकता स्थापित करना है।

अधिवक्ता सिंह ने कहा कि आज के समय में अधिवक्ताओं को नारद परंपरा से प्रेरणा लेकर वकालत को व्यवसाय नहीं, सेवा के रूप में अपनाना चाहिए। जब समाज का कमजोर व्यक्ति न्याय की आस लेकर अधिवक्ता के पास आता है, तब अधिवक्ता पर केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी आ जाती है।

उन्होंने कहा कि कानून का अंतिम लक्ष्य जीत नहीं, न्याय है, और जब तक अधिवक्ता सत्य के मार्ग पर चलते रहेंगे, तब तक समाज में न्याय की लौ प्रज्वलित रहेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!