रिश्तों के गणित को सुलझा रही हूं।
कभी गुणा तो कभी भाग कर रही हूं।
जो कदर ना करे मेरी उसको घटा रही हूं।
जो चाहता है मुझको उससे जुड़ रही हूं।
©️✍️®️
बंदना मिश्रा
देवरिया उत्तर प्रदेश
रिश्तों के गणित को सुलझा रही हूं।
कभी गुणा तो कभी भाग कर रही हूं।
जो कदर ना करे मेरी उसको घटा रही हूं।
जो चाहता है मुझको उससे जुड़ रही हूं।
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बंदना मिश्रा
देवरिया उत्तर प्रदेश