अब ठंड हुई प्रचंड थर-थर-कांपे लोग
नाक से पानी बहे जैसे लगा जुकाम का रोग
लगा जुकाम का रोग बढ़ती है परेशानी
दो माह की ठंड याद दिला देती है नानी
पेड़ों का पतझड़ हुआ छीन लिया रंग रूप
धुंध कोहरा खूब दिखे, दिखे ना खिलती धूप
सूरज फिर ताकतवर होंगे दो माह के बाद
हम जैसे बूढ़े लोग करें अब गर्मी को याद
सदा ना रहा कोई यहां कहते साधु और संत
बरसात की तरह होगा इस सर्दी का भी अंत
पं पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कला हरिद्वार उत्तराखंड




