साहित्य

आज के दिव्यांगजन

मुकेश कुमार दीक्षित 'शिवांश'

अंग विछिन्न हुए हैं इनके,
पर नहीं किसी से कम तो हैं।
अच्छे- अच्छे कर सके न जो,
उनमें करने का दम तो है।।

खेल चाहे शासन प्रशासन,
सबमें इनकी भागेदारी।
खूब बखूबी निभा रहे हैं,
अपनी सारी जिम्मेदारी।।

जोश भरो इनमें भी इतना,
जिससे वे भी आगे आयें।
खुशी खुशी से पथ पर अपने,
बिना रुके वे बढ़ते जाये।।

यशवान और वैभवशाली,
दे रहे इन्हे अपमान है।
कर जोड़ विनय करता उनसे,
अब इनका करो सम्मान है।।

संगीत, कला, विद्या में भी,
दिव्यांग हुए अब हैं विशेष।
हस्तक्षेप इनका जहाँ न हो,
क्षेत्र रहा न कोई भी शेष।।

मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’
चंदौसी, संभल, उत्तर प्रदेश
मो०-8433013409

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!