
बहुआयामी व्यक्तित्व धनी अटल जी,
दूरदर्शी राजनेता, हिंदी सिद्धहस्त कवि।
ओजस्वी भाषणों से सदा करते अचंभित।
वह राजनीतिक गलियारे के उदित रवि।
वह आत्मविश्वास के स्वर्णिम हस्ताक्षर।
सुशोभित सांस्कृतिक,दार्शनिक विचार।
पाँच दशकों से अधिक रहकर सांसद।
लोकतांत्रिक सामंजस्य का किया प्रसार।
शब्द विन्यास के वह निपुण फनकार,
वक्तव्यों से करते दिलों में अधिकार।
सुनकर शत्रु उनके बन जाते थे श्रोता
अटल आदर्श लोकतंत्र के बने आधार।
ऐतिहासिक सफलताएं की अर्जित,
राष्ट्र निर्माण को अटल समर्पित।
पोखरण की धरती पर कर उद्घोष,
शिक्षा तकनीकी संस्थान स्थापित ।
उन्होंने दी स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना।
राजनीति में भर दी साहित्यिक संवेदना।
देश के सर्वोच्च सम्मान से हुए अलंकृत।
युगदृष्टा ने राष्ट्रनिर्माण की भरी चेतना।
निधि वर्मा
इंदिरापुरम्, ग़ाज़ियाबाद




