साहित्य

यादें अटल की

कमल पटेल

इक बात मैं सोचता रहता हूं हर पल,
काश! हमारे सांथ में होते जो आज अटल।

कितने खुश होते जब देखते,
हो रहे उनके सपने साकार,
विश्व पटल पर भारत की,
गरिमा अब लेने लगी है आकार।।

प्रगति की ओर बढ़ रहा भारतवर्ष प्रतिपल,
काश! हमारे बीच में होते जो आज अटल।

नतमस्तक हो रहा है वो पश्चिम,
जो कभी आंखें दिखाता था।
पूरी दुनिया को केवल,
अपनी ही संस्कृति सीखाता था।।

भारत की जय जयकार हो रही विश्व में,
गूंजायमान हो रहा है जन गण मन।
शक्ति संपन्न होते देख भारत को,
दुश्मन देश में मची हलचल।।

इक बात में सोचता रहता हूं हर पल,
काश! हमारे सांथ में जो होते आज अटल।।

वे होते तो देखते-हो रहा नवभारत निर्माण,
धर्म के उत्थान का अयोध्या दे रही प्रमाण।
जब रामलला विराजे आया वो भी पल,
खुशी से सरयू मैया बह रही है कल-कल।।

बस इक बात मैं सोचता रहता हूं हर पल,
काश! हमारे सांथ में होते जो आज अटल।।
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स्वरचित-
कमल पटेल
ग्राम चकरावदा
जिला उज्जैन (मध्य प्रदेश)

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