
अटल जयंती पर करें, शत् शत् बार प्रणाम ।
भारत के वह रत्न हैं, अनुपम रहा मुकाम ।।१।।
नियमों के पालक बहुत, पत्थर खिची लकीर ।
बाधाओं को पार कर, कर्म किए अविराम ।।२।।
मन में जो भी ठानते, दिया उसे भी रूप ।
गीदड़ भभकी पर सदा, कस कर रखी लगाम ।।३।।
बाबर की करतूत पर, किया देश को एक ।
न्याय-नीति से लड़ कहा, पायें मंदिर राम ।।४।।
धन्य-धन्य है ग्वालियर, गौरव मध्य प्रदेश ।
अनुपम रहे प्रधान वह, कवि हृदय अभिराम ।।५।।
पाक पड़ौसी को कहा, करो भ्रात-व्यवहार ।
मगर नहीं सुधरा तभी, किया जाम-बदनाम ।।६।।
सबके प्रिय नेता रहे, भेदभाव से दूर ।
जनहित में सब कर्म थे, किये सभी के काम ।।७।।
-राम किशोर वर्मा
रामपुर (उ०प्र०)
दिनांक:- २४-१२-२०२५ बुधवार


