
नव वर्ष हमारा
यूँ तो चैत्र मास नव वर्ष हमारा।
शुक्ल प्रतिपदा हमें है प्यारा।।
गया अंग्रेज़ी मास दिसंबर।
आया जनवरी मृदुल सुंदर।।
जब आता अंग्रेजी नव वर्ष।
खूब मनातें हम भी हर्ष।।
नए वर्ष के नए सपने होंगे।
साथ हमारे अपने होंगे।।
नर्तन करती बयार होगी।
रात सुहानी सुन्दर प्रभात होंगे।।
मात-पिता के प्यार होंगे।।
जीवन में सुख व्याप्त होंगे।
मन मंदिर में रहेंगे संयम।
हृदय में बहेंगी गंगा, झेलम।।
हरे खेत खलियान होंगे।
पल्लवित हर उद्दान होंगे।।
रुबाई को न कोई गम होंगे।
संग गजल के सरगम होंगे।।
गिले शिकवे सब दूर होंगे।
अपनों के संग रिश्ते गहरे होंगे।
नए वर्ष के नए सपने होंगे।
साथ में सब अपने होंगे।।
✍️ कविता ए झा
नवी मुम्बई




