
लो बीत गया यह वर्ष पुराना।
बीत गई नित रेन सुहानी।
बीत गए जीवन के पल वो।
बीत गई जीवन की कहानी।
बीत गया बिन साथ मित्र के।
अमूल्य पल थी जो निशानी।
बीत गई वह सांझ पिया बिन
बीत गई वह प्रेम कहानी।
वर्ष का पल-पल घट गया है।
उम्र का हर पल बढ़ रहा है।
जाग जा मनवा देर हो गई।
मौत हर पल बाट जोह रही।
छोड़ दे मिथिया गुरुर को अपने।
जीवन का आ सृजन कर ले।
*वर्ष के आखिरी दिन* में मनवा।
सबसे मिलना जुलना कर ले।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




