साहित्य

दिसंबर की सर्दी

बंदना मिश्रा

दिसंबर की सर्दी कहर ढा रही है।
सोचा न था इस तरह जा रही है।

करना हैं स्वागत नए साल का।
निकलना न बाहर धमका रही है।

रौब दिखा के डराए है हमको।
बड़ी है बड़प्पन न दिखला रही है

©️✍️®️
बंदना मिश्रा
देवरिया उत्तर प्रदेश

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