साहित्य

गौरव गान लिखा

मीना जैन

बीसवीं सदी में जन्म हमारा
दो सदियों का इतिहास रचा
देखी स्वतंत्र भारत की भोर
अमृत काल का गौरव गान लिखा….

साँझा चूल्हा था परिवारों में
गैस की पाइप लाइन देखी
रेल की यात्रा थी रोमांचक
अब वायुयान में उड़ान भरी
था रेडियो, श्वेत-श्याम टी वी
फिर सतरंगी, बहुरंगी रूप दिखा….

छोटे घर में था बड़ा परिवार
अब बड़े घर में एकाकीपन
हँसता-खिलखिलाता था वह दौर
प्यारा-प्यारा था अपना बचपन!
चिट्ठियों की थी निराली दुनिया
अब मोवाइल पर sms लिखा….

कृषि प्रधान देश था अपना
किए तकनीकी क्षेत्रों में हस्ताक्षर
लालटेन और ढिबरी के मीत
पहुँचे अंतरिक्ष में उड़कर
घूंघट में था दुलहन का चेहरा
परिधानों में काया-पलट देखा….

देखी युद्ध की विभीषिका
कोरोना काल की त्रासदी
बदलते मौसम, बदलती सरकारें
समय ने बदलती तसवीर दिखादी
साफ़-सुथरा था पर्यावरण
धुँआ-धुँआ प्रदूषण देखा….

समय हमारा गौरवशाली
इतिहास गाता गौरव कीर्ती
दो शताब्दियों के हम साक्षी
इस पीढ़ी के अनुभव मोती
नव जागरण का नव गीत
नई पीढ़ी के नाम लिखा….

बीसवीं सदी में जन्म हमारा
दो सदियों का इतिहास रचा
देखी स्वतंत्र भारत की भोर
अमृत काल का गौरव गान लिखा….।

✍️मीना जैन
इंदिरापुरम, गाजियाबाद.

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