साहित्य

नव जगत का संचार अखबार

कुलदीप सिंह रुहेला

नव जगत का संचार चला, हर घर ज्ञान उजागर हो,
काग़ज़ पर सजी स्याही से, सच का दीप प्रज्वलित हो।
भोर हुई तो साथ हमारे, ये अख़बार आ जाता है,
सोई हुई उम्मीदों को, नयी उड़ान दिखाता है।

गीता की वाणी सा पावन, हर अक्षर में धर्म बहे,
राम नाम की मर्यादा, हर खबर के संग-संग रहे।
कर्म करो, फल खुद मिलेगा, यही संदेश सुनाता है,
जीवन-पथ पर भटके मन को, सच्ची राह दिखाता है।

किसान पढ़े तो खेत हँसे, मजदूर को हौसला मिले,
छात्रों के सपनों को भी, दिशा नई हर रोज़ मिले।
कलम बनी है आज युगों की, सबसे सशक्त तलवार,
अन्याय से टकरा जाती, बनकर सच की हुंकार।

नौकरी, सेवा, व्यापार सभी, सपनों को ये सींचे,
मेहनत की पूजा सिखाकर,मंज़िल खुद खिंची चली आए।
मंदिर की घंटी सा पावन, इसका हर एक स्वर,
जीवन को सुंदर कर देता, मिटा अंधेरे का डर।

नव जगत का संचार नहीं, ये तो जन-जन की आवाज़,
भारत माँ के उज्ज्वल भविष्य का, लिखता है इतिहास।
सत्य, धर्म और कर्म पथ पर, चलना हमें सिखाए,
नव जगत के हर पन्ने में, नया सवेरा मुस्काए।

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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