साहित्य

गीत के माध्यम से बालकांड का एक प्रसंग

डॉ.राजेश श्रीवास्तव राज

राम नयन के तारे मेरे,वन को कैसे जाएंगे?
ऋषिवर मेरी विनय आपसे,धनुष उठा क्या पाएंगे?

देख अभी मैने हाथों से,थोड़ा बहुत खिलाया है।
चौथेपन में पिता धर्म का,कितना कहाँ निभाया है।।
सोच यही दिल घबराता है,कंदमूल क्या खाएंगे ?
राम नयन के तारे मेरे,वन को कैसे जाएंगे ?१

कोमल हृदय अभी उसका है,माँ का राज दुलारा है।
लखन भात्र भी उसका छोटा,उनके नैनन तारा है।।
हिंसक दानव वन में भारी,राघव क्या लड़ पाएंगे ?
राम नयन के तारे मेरे,वन को कैसे जाएंगे?२

सुन कर दशरथ ऋषि वचनों को,मन अपना समझाते है।
राघव ही श्री नारायण है,साहस तनिक जुटाते है।।
यज्ञों से रक्षित वन में क्या,क्षत्रिय कर्म निभाएंगे ?
राम नैन के तारे मेरे,वन को कैसे जाएंगे?३

शस्त्र कर्म है थोड़ा सीखा,धनुष अभी सम्भाला है।
माताएं भी चिंतित सारी,सहज भाव से पाला है।।
राम अभी कैसे वन जाकर,रण कौशल दिखलाएंगे ?
राम नयन के तारे मेरे,वन को कैसे जाएंगे?४

डॉ.राजेश श्रीवास्तव राज

 

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