साहित्य

गजल

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

भूल जा अब दिखें लौट आ लौट आ,
प्यार आ के जता लौट आ लौट आ।

रात तू याद में आ गया कुछ सुना,
क्यों फिजा को सता लौट आ लौट आ।

जख्म दिल के जले मैं अकेली सही,
दर्द से यूँ हटा लौट आ लौट आ।

भीड़ में होश खो कर उदासी मिली,
बेबसी को मिटा लौट आ लौट आ।

राह में खुशबुएँ संग अब तक खड़ी,
मन सुमन का सजा लौट आ लौट आ।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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