
अति मनोरम हरित कोमल, कलित पल्लव के हिलोरे
नन्हे नन्हें पावस कण से,बिखरे पत्रक जब पवन निहारे
जी चाहे मुट्ठी में भर लूँ, सिर पर उनकी वर्षा कर लूँ
केसरिया खिला रंग पुष्पक्रम,गर्मी में भी हिय हर्षाये
शीत संग संतुष्टि अनुभव,जब सुखद छाया मिल जाये
हल्की सी भी जब हवा चले,पल्लव के मोती बिखरे जाये
वातावरण हो जाए परिशुद्घ,हवा बहे ताज़ी और शुद्ध
उच्च तना छतरी सी विन्यसित दिखे पर्ण लगी क्रमबद्ध
रम्य पुष्प आकर्षण बरसाए,देख झलक मन ललचाये
चाहूँ हाथों में आ जाये,बचपन से ही मुझे गुलमोहर भाये
मीनाक्षी शर्मा ‘मनुश्री’
गाजियाबाद (उ. प्र.)



