साहित्य

गुरु गोविन्द सिंह जी

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

भारत की आजादी का इतिहास,
अमर शहीदों के रक्त से लिखा गया ।

22 दिसंबर सन् 1666अवतारी महापुरुष,
पटना सिटी में जन्म लिए थे ।

सौम्या साध्वी माता गुज़री,
पिता गुरु तेग बहादुर अमर सेनानी थे।

गोविन्द घर अवतार लिए,
मामा क‌पालचंद ने गोविंद नाम दियो।

सिख पंथ के जन्मदाता पूर्व जन्म की,
सारी बातें कविता में ही लिखे थे।

खेल नहीं साधारण खेले बना टोलियां,
लीडर वे स्वयं बन जाते थे।

औरंगजेब का अत्याचार हिन्दू से मुस्लिम,
बन जायें नहीं तो अपना सर कटवाये।

पाॅंच सिखों ने शीश दियापर नहीं झुके थे,
पंच प्यारे वे कहलाये।

पाॅंचों भाई दया, धर्म,मोहकम,,साहिब,
और हिम्मत सिंह धर्म में अमर हुए।

सिखों के अरदास समय सदा,
सर्वदा आज तक ये स्मरण किये गये।

सन्1699दसम ग्रंथ को संपूर्ण साहित्य,
वे ही लिखे और लिखवाये।

फारसी संस्कृत,ब्रजभाषा, पंजाबी के,
बहुत बड़े ज्ञाता लोहा सबसे मनवाये।

केश,कंघा,कृपाण,कच्छा,वाला धारण करें,
वहीं सचमुच सिख कहलाये।

लाखों में एक अकेला दिखें कहीं हो,
वे फौजी पहचान दिलाये।

तीन काम करवाये सबसे पहले,
तन मन धन शिक्षा में लगवाये।

दूसरी शक्ति संचयन,लक्ष – लक्ष फौजी ताकत,
सब मिलकर बढ़वाये।

तीसरी शिक्षा हो ऐसी जो स्वयं बने,
सैनिक मन में अगन जगाये।

अंत समय गुरु ग्रंथ साहब ही गुरु हैं।
सब संगत बुला कर समझाये।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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