
जीवन !
एक सफ़ीना है ।
कभी लहरों से जूझना ।
कभी तूफ़ा से टकराना ।
कभी बहाव के विपरीत ;
बह , मॅंझधार में डूबना ।
जीवन !
श्रमिक पसीना है ।
कभी दुपहरी – सा जलना ।
कभी छप्पर – सा टपकना ।
कभी बर्फ़ीली रातों में ;
मुफ़लिसों-सा कॅंपकॅंपाना ।
जीवन !
एक करीना है ।
कभी पत्तियों – सा झड़ना ।
कभी गाॅंवों – सा उजड़ना ।
कभी अधरों से दूर हो ;
मुस्कुराहट – सा बिछड़ना ।
जीवन !
अश्क़ नगीना है ।
कभी भुख़मरी में जीना ।
कभी ऑंसुओं को पीना ।
कभी अपनों की पीर से ;
ताउम्र फटा दिल सीना ।
जीवन !
एक रवीना है ।
M.N. – 9977644232
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‘ आज की कविता ‘ में सादर प्रकाशनार्थ –




