साहित्य

जो वफ़ा हैं कि

कनक

जो वफ़ा हैं कि वफ़ा लगता हैं
वो मुहब्बत में खपा लगता हैं।।//१//

याद में जल के वह चला हैं जो
वो खपा हैं कि खपा लगता हैं।।//२//

जब सुनाई गज़ल भी उसने भी
हमको वह भी तो बुरा लगता हैं।।//३//

उसके ग़म में हुआ मैं भी पागल
दिल लगाना यार बुरा लगता हैं।।//४//

प्यार में पागल वो गिला लगता हैं
जिन्दगी में वो मिला लगता हैं ।।//५//

छाले पांवों में ही पड़े हैं उसके
जाने राही भी चला लगता हैं।।//६//

हमसे नाराज़ खपा लगता हैं
खो के वो प्यार जफा लगता हैं।।//७//

कनक

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