
दो हजार छब्बीस मिला है।
उम्मीदों का फूल खिला है ।
परम पिता की सदा दुआ हो,
उनकी बगिया खूब खिले ।
खुशियों की बरसें सौगातें ,
सुख के सुंदर दीप जलें ।
खिलते रहें गुलाब सदा ही ,
साँसों की अगणित शाखों पर ।
सुंदर अभिलाषाएं पूरी हों ,
नित नवल वर्ष की राहों पर ।
दो हजार छब्बीस मिला है
उम्मीदों का फूल खिला है ।
परमपिता की सदा दुआ हो
जग में सुंदर दीप जलें ।।
दुःख दारिद का नाम न होवे,
सबको खुशियां रोज मिलें ।
आँधी बनकर ख़ुशबू बिखरे ,
भारत माता के दामन पर ।
सपनों की नइया तट पहुँचे ,
नित नवल वर्ष के आँगन पर ।
सुषमा दीक्षित शुक्ला




