साहित्य

मंगलमय हो नववर्ष

सुषमा दीक्षित शुक्ला

दो हजार छब्बीस मिला है।
उम्मीदों का फूल खिला है ।

परम पिता की सदा दुआ हो,
उनकी बगिया खूब खिले ।

खुशियों की बरसें सौगातें ,
सुख के सुंदर दीप जलें ।

खिलते रहें गुलाब सदा ही ,
साँसों की अगणित शाखों पर ।

सुंदर अभिलाषाएं पूरी हों ,
नित नवल वर्ष की राहों पर ।

दो हजार छब्बीस मिला है
उम्मीदों का फूल खिला है ।

परमपिता की सदा दुआ हो
जग में सुंदर दीप जलें ।।

दुःख दारिद का नाम न होवे,
सबको खुशियां रोज मिलें ।

आँधी बनकर ख़ुशबू बिखरे ,
भारत माता के दामन पर ।

सपनों की नइया तट पहुँचे ,
नित नवल वर्ष के आँगन पर ।

सुषमा दीक्षित शुक्ला

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