
अटल हमारे प्रेरणा स्रोत,भारत माँ की शान है,
सत्य, साहस, सेवा लेकर, दी हमें पहचान है।
पच्चीस दिसंबर बोला—देश को स्वर मिला,
वाणी में वेदना थी, विचारों में बल मिला।
कवि भी वही, राजनेता भी वही महान,
भारत को मिला अटल, दृढ़ संकल्प की पहचान।
अटल हमारे प्रेरणा स्रोत,भारत माँ की शान है।
सत्य, साहस, सेवा लेकर, दी हमें पहचान है।
पोखरण ने गर्जना की—अब भारत मौन नहीं,
स्वर्णिम सड़कों ने कहा—ये सपने व्यर्थ नहीं।
सुशासन, विकास, संवाद का दिया मंत्र,
विश्व मंच पर सिर उठाकर खड़ा हुआ स्वतंत्र।
अटल हमारे प्रेरणा स्रोत,भारत माँ की शान है।
सत्य, साहस, सेवा लेकर, दी हमें पहचान है।
विरोध में भी मर्यादा, सत्ता में भी संयम था,
राजधर्म का पाठ पढ़ाया, हर क्षण दम था।
जो कहता था वो करता, कथनी में छल न था,
राजनीति में रहकर भी कविता का कल था।
अटल हमारे प्रेरणा स्रोत,भारत माँ की शान है।
सत्य, साहस, सेवा लेकर, दी हमें पहचान है।
सोलह अगस्त ने कहा—देह गई, युग रह गया,
एक व्यक्तित्व नहीं, भारत का स्वप्न बह गया।
नाम नहीं था केवल अटल, युग की पहचान,
भारत रत्न बनकर रहे, हर दिल का सम्मान।
“अटल थे, अटल हैं, अटल रहेंगे!”
“भारत माता की जय!”
दिनेश पाल सिंह दिलकश
जनपद संभल उत्तर प्रदेश




