
मन में नवल उल्लास है अब,
आ रहा है वर्ष नव,
मलिनता मिट जाएगी सब,
दिल में है अब हर्ष नव।
असफलता की बात तो,
इतिहास अब हो जाएगी,
सफलता कदमों में होगी,
होगा जब संघर्ष नव।
पूर्ण है विश्वास सब,
उन्नति शिखर चढ़ पावेंगे,
आपका, मेरा, सभी का,
होगा अब उत्कर्ष नव।
नवगीत ही अब होयेंगे,
संगीत भी होगा नवल,
सरगम के सुर होंगे नये,
लय ताल नव और छन्द नव।
एक नव भारत का हम,
निर्माण करने जा रहे,
नीव भी होगी नयी,
छत भी नयी और फर्श नव।
– नरेश चन्द्र उनियाल,
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड।




