साहित्य

नव वर्ष मंगलमय हो

डा राजेश तिवारी मक्खन

मंगलमय नव वर्ष आपको, दे दे खुशियां सारी ।
आधिव्याधि सब दूर होय नित रक्षा करें मुरारी ।।

बीता गया जो बीत गया सो सोचो क्या हुई गलती ।
करने में सावधान रहो तुम करो काम शुभ जल्दी ।।
विश्व गुरु बन जाये भारत शुभ इच्छा यही हमारी ।
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सुख दुख से ऊपर उठकर के काम तुम्हें है करना ।
देश प्रेम कर राष्ट्र के हित में सैनिक जीना मरना ।।
करो कर्म अधिकार तुम्हारा फल इच्छा बलिहारी ।
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युवा वर्ग को अच्छी शिक्षा हर दम तुम्हें है देना ।
मात पिता की सेवा कर आशीष शीश पर लेना ।।
वृद्धाश्रम न जाये कोई बस सुन लो विनय हमारी।
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लाड़ प्यार बच्चों को देना सत् पथ गमन सिखाना ।
देश धर्म मर्याद सिखा पश्चिमीसंस्कृति न अपनाना ।।
कर आचरण श्रीरामकृष्ण सा जाकी महिमा भारी ।
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सस्य श्याला धरती मां हो सब बच्चे आज्ञाकारी ।
शासन सत्ता धर्ममयी हो सब हो जाये सदाचारी ।।
होय अधर्म नाश मुदित हो मंगलमय सब संसारी ।
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मानव बन जाये जग सारा ये पावन संकल्प हमारा ।
रहे दनुजता न धरती पर सदाचार का हो विस्तारा ।।
फूलें फलें सब वृक्ष लतायें बहें सुगंध सब वयारी ।
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डा राजेश तिवारी मक्खन
झांसी उ प्र

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