
ये जमाना भी बेकार हो गया
वक्त की रफ़्तार से टकरार हो गया,
दिलों की बातें अब कम हो गईं,
मोबाइल में ही सारा प्यार हो गया।
ये रिश्ते नाते दोस्ती ये भाईचारा,
सब दिखावे के चोचले हैं प्यारे,
सामने मीठे बोल सभी के,
पीछे ताने और इशारा हो गया!
मतलब का ही हर व्यवहार ,
काम पड़े तो याद करें सब,
वरना दिल से इनकार हो गया
ये जमाना भी बेकार हो गया!
हंसी के पीछे बहुत दर्द छिपा है,
चेहरे पर नकली मुस्कान हो गया,
सच्चाई की राह जो पकड़े राही,
वो ही दुनिया में लाचार हो गया।
फिर भी दिल ये कहता यारो,
इंसानियत का दीप जलाओ,
झूठे रंगों से दूर रहो तुम सब ,
सच्चे रिश्तों को फिर से बचा लो यारो !
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




