कल से कवि लगे हुए हैं कि हो गया नए वर्ष का आगाज
हे श्रेष्ठ प्राणियों नया वर्ष कैसे यह मुझे बताओ आज
बताओ आज तुम हो जगत के बड़े ज्ञानी ध्यानी
1 जनवरी का गुणगान देख मैं हो रहा पानी पानी
नहीं बताते कोई बात नहीं तो याद रखो यह बात सदा
नया वर्ष शुरू होगा वह तिथि है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
अभी अगर अंधियारा है तो जलाओ ज्ञान की की टॉर्च
भारतीय नया वर्ष आने में अभी बीता नहीं है मार्च
इसी तिथि का प्रचार करो यह आपकी है जिम्मेदारी
बहुत दिनों कर रहे हैं हम अपने हिंदी महीने से मक्कारी
सनातन को मिटाने का है यह अंग्रेजों का छल
इस गलती को आज सुधारो तब सुधरेगा कल
पं पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कला हरिद्वार उत्तराखंड




