जाते हुए साल को सलाम
फिर एक दिसंबर जा रहा।
कुछ साथी मिले कुछ बिछड़ गए
यादों की किताब में यादें लिख चले
फिर एक दिसंबर – – – – – – – –
अरमानों की ट्रेन में मंजिल को पाने दौड़ रहे
स्टेशन पीछे छुट रहे आखरी पडाव को पाने।
फिर एक दिसंबर – – – – – – – –
कुछ पा लिया कुछ पाना शेष रहा
गऐ वक्त में उम्र का साथ घट रहा।
फिर एक दिसंबर – – – – – – – –
यादों की गठरी बना मैने मचान पर बांध दिया
जनवरी आने से पहले खूंटी पर टांग दिया।
फिर एक दिसंबर – – – – – – – –
बुढा दिसंबर अपने साथ खट्टी मिट्ठी यादें बाटॅ रहा
जनवरी आने पर नई किरणें बिखेर रहा।
फिर एक दिसंबर – – – – – – – -।
मेघा अग्रवाल
*नागपूर महाराष्ट्र*
*7020255407*




