साहित्य

आया नववर्ष

मधु वशिष्ठ

आया नववर्ष है, आओ कुछ नया कर दिखाएं।
बीते वर्षों से लेकर सबक, कुछ नए प्रण हम निभाएं।
नव वर्ष की नई सुबह, जल्दी उठकर आंख खोलकर देखें प्रकृति को एक बार।
फिर मन में सोचें इस प्रकृति पर हमारा ही नहीं, अपितु पशु पक्षियों का भी है अधिकार।
आओ प्रण लें इस वर्ष हम कंक्रीट के जंगल नहीं उगाएंगे।
नव वर्ष में नए पेड़ उगाकर, जल संसाधनों को बचाकर, प्रदूषण से पृथ्वी को मुक्त बनाकर पर्यावरण की सुरक्षा का वादा निभाएंगे।
थोड़ी-थोड़ी दूर के लिए भी हम गाड़ी नहीं उठाएंगे।
जहां तक हो सकेगा, हम साइकिल पर या पैदल चलकर जाएंगे।
पश्चिमी सभ्यता का अनुकरण करके जो मदर्स डे फादर्स डे मनाया था,
महिलाओं को सुरक्षित करने के लिए गत वर्ष जो अभियान चलाया था।
एक बार फिर पुनर्विचार कर, सुबह सवेरे रोज मात-पिता का चरण स्पर्श कर,
हम हर दिन मदर्स डे और फादर्स डे मनाएंगे।
महिलाओं को सुरक्षित करने के लिए किसी सेमिनार और अभियान की जरूरत पड़ेगी ही कहां?
घर में पुत्र के आते ही हम उसके भी प्रतिदिन के क्रियाकलाप पर नजर घुमाएंगे।
बेटियां स्वतः ही सुरक्षित हो जाएंगी यदि हम अपने पुत्रों को संस्कार सिखाएंगे।
प्रण करते हैं इस वर्ष, हम इन आदर्शों को अपनाएंगे और एक बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।

मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा

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