
1
फिर से है सर्दी आई
शीत लहर है छाई
आग सबको है भाई
आनंद उठाइए।।
2
कोहरा धुंध दिखे है
कवि कविता लिखे है
पकौड़ा खूब बिके है
सबको खिलाइए।।
3
जाड़े की बहार आई
धूप भी कभी है छाई
सर्दी से राहत पाई
ये ऋतु भी चाहिए।।
4
पत्ता – पत्ता खिल उठे
गर्मी का संकट मिटे
स्वयं का ध्यान भी रखें
खुद को बचाइए।।
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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।



