
नव उजास का वर्ष 2026 द्वार खड़ा मुस्काता है,
आशाओं की पोटली लेकर भविष्य गीत सुनाता है।
बीते कल को विस्मृत कर के,नव संकल्प जग जाता है,
सूरज की पहली किरण संग जीवन फिर मुस्काता है।
रात की चादर धीरे-धीरे
जब धरती से उतर जाती है,
सूरज की पहली किरण
आशा का पत्र लिख जाती है।
कहती है—उठो, थके पाँवो,
नई राहें पुकार रही हैं,
बीते कल की छाया छोड़ो,
सुनहरी सुबह निहार रही है।
अंधेरों से डरना कैसा,
मैं उजास का नाम हूँ,
हर हार में भी छुपी जीत
मेरा ही पैग़ाम हूँ।
ओस की बूँदों में चमककर
सपनों को सच करती हूँ,
विश्वास की लौ जलाकर
जीवन को अर्थ भरती हूँ।
चलो, कर्म के पथ पर बढ़ो,
समय किसी का ठहरता नहीं,
सूरज की पहली किरण कहती—
आज का दिन फिर हारता नहीं।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




