
शब्द बोले या न बोले बोलती है जिन्दगी।
आइना बोले न बोले बोलती है जिन्दगी।
चल रही आंधी से आखिर ये श़जर डोलेगें ही,
वक्त डोले या न डोले डोलती है जिन्दगी।
मौन हैं धृतराष्ट्र और अंधी बनी गांधारी मां,
यह ज़हर पागल दिलों में घोलती है जिन्दगी।
सच तुम्हारी बात है या फिर हमारी बात है,
कौन कब देखे सुने सब तोलती है जिन्दगी।
किसका कितना सच यहां किसका कितना झूठ है,
झूठ – सच के दरमियां बस झूलती है जिन्दगी।
यह सफर जिनके सहारे आज तक आया चला,
उस डगर के सारे सपने खोलती है जिन्दगी।
वाई.वेद प्रकाश
द्वारा विद्या रमण फाउंडेशन
शंकर नगर, मुराई बाग,डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश
229207
9670040890




