
तेरे न आने से ही तो रूठा हुआ था मैं
जाने वो आयेगा इसलिए बैठा हुआ था मैं।।
कैसे यक़ीन हो अब तो मुझको भी तू बता
तेरे ही इंतज़ार में बैठा हुआ था मैं।।
तुझ बिन नहीं है चैन यहां यार मुझको भी
तेरे बग़ैर आज भी तो तन्हा हुआ था मैं।।
यादों में हौंसला रख चला था मैं दिल जिगर
ख़ुद को न देख के फ़िर भी डूबा हुआ था मैं।।
उसको न था यक़ीन मुझ पे कोई भी चारा था
ना जाने क्यूं ख़्वाब से बहला हुआ था मैं।।
कनक



