फ्री मे मिलने की तदबीर में
आस्था पत्थर की तस्वीर में
पंडित से आज भी पूछ रहे
क्या लिखा मेरी तकदीर में
कर्म पर जिन्हें भरोसा नहीं
भरोसा हाथ की लकीर में
अंधविश्वास अभी कितना
साहब देखो इस नजीर में
बस उसको शिक्षित मानो
जो न फंसा इस जंजीर में
पंडित पुष्पराज धीमान भुलक्कड़
गांव नसीरपुर कला हरिद्वार उत्तराखंड



