
दिन-प्रतिदिन तापमान में तेजी से गिरावट आ रही है। इस ठंड के मौसम में विशेष सावधानी की आवश्यकता 60 वर्ष से अधिक आयु के उन सभी लोगों को है जो मधुमेह , उच्च रक्तचाप , हृदय रोग या दिमाग संबंधी बीमारियों (जैसे ब्रेन स्ट्रोक) से पीड़ित हैं।
यह तथ्य ज्ञात है कि हर 1.8°C तापमान में गिरावट से हृदयाघात की संभावना बढ़ जाती है। ठंड में धमनियों का सिकुड़ना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिससे हृदय को रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए अधिक दबाव में कार्य करना पड़ता है। यही कारण है कि इस मौसम में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, सांस की तकलीफ और ब्लड प्रेशर बढ़ने जैसी समस्याएँ अधिक देखी जाती हैं।
सर्दी में रखें यह सावधानियाँ :- सुबह अंधेरे में टहलने न जाएँ। इस समय ठंड सबसे अधिक होती है। हल्की धूप निकलने के बाद या शाम के समय टहलना अधिक सुरक्षित है ।अचानक अत्यधिक शारीरिक परिश्रम न करें। बीच-बीच में आराम लेते रहें, ताकि हृदय पर अनावश्यक दबाव न पड़े। रात का भोजन हल्का रखें । ठंड में भूख अधिक लगती है, परंतु भारी भोजन हृदय और पाचन दोनों के लिए हानिकारक है।मधुमेह के रोगी सावधान रहें । भोजन के बाद गुड़ या अतिरिक्त मिठाई का सेवन न करें। “सर्दी में मीठा फायदेमंद है” यह एक भ्रम है। किसी भी प्रकार का नशा (शराब, तंबाकू आदि) न करें । इससे हृदय की धड़कन अनियमित हो सकती है।
अपनी दवाइयाँ हमेशा पास रखें । विशेषकर हृदय, ब्लड प्रेशर या शुगर के मरीज अपनी दवाएँ समय पर लें, उन्हें अचानक बंद न करें उचित गर्म कपड़े पहनें । सिर, पैर और कानों को ठंड से बचाएँ। नहाने के लिए केवल गुनगुने पानी का प्रयोग करें।चिकित्सक से नियमित परामर्श लेते रहें । बिना सलाह के कोई नई दवा न लें और न ही पुरानी दवा बंद करें। इन कुछ सरल नियमों को यदि हम सभी जीवनशैली का हिस्सा बना लें, तो न केवल सर्दी के मौसम में बल्कि पूरे वर्ष हम मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ब्रेन स्ट्रोक एवं हृदयाघात जैसी गंभीर बीमारियों से स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं। याद रखें बेहतर स्वास्थ्य ही आपकी सबसे बड़ी पूँजी है।



