
देखो…,देखो प्रिये..,
वो टूटा हुआ इक तारा,
कैसे जा रहा है दूर,
बिछुड़ कर अपनों से,
इस अंबर के आंगन से,
होने को विलीन दूर गगन में,
एकाकी…,
वो टूटा हुआ इक तारा |
होंगे , उसके भी अपने
संगी साथी और रिश्ते नाते,
कुछ पल को -वो भी,
हुए होंगे उदास और
रोये भी होंगे -उसके लिए,
क्योंकि,
वो होगा उनका बेहद प्यारा,
और दुलारा आँखों का तारा,
वो टूटा हुआ इक तारा |
शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब




