
भूल गए इतिहास क्यों? पढ़े लिखे भी आज ।
वीर बाल के इस दिवस, बांँटे खुशी समाज।।
भटक गई पीढ़ी किधर ,कारण इसका कौन ।
वीर बाल की याद में, कुछ क्षण रह लो मौन।।
नन्हे छलावे से फंँसे ,किये प्रताड़ित खूब।
अश्रु बहाए इक नहीं, चिंता में अरि डूब।।
देख मृत्यु रोए नहीं, नन्हे साहसिक वीर।
झुके नहीं अरि अग्र वह, धर्म निभाएं धीर।।
स्वर्णिम अक्षर से सजा, घोर चमकौर युद्ध।
अर्पण गुरु गोविंद का ,कहते रहे प्रबुद्ध।।
किरण कुमारी ‘वर्तनी’ जमशेदपुर




