बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट की मासिक गोष्ठी में गूँजी कविताओं की स्वर लहरियाँ

झारखंड ।
बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट (झारखंड इकाई) के तत्वावधान में दिनांक 19 जनवरी को मासिक ऑनलाइन गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। ‘स्वैच्छिक’ विषय पर आधारित इस साहित्यिक संध्या में रचनाकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज, संवेदना और श्रृंगार के विभिन्न रंगों को पटल पर बिखेरा।
साहित्यिक प्रस्तुतियों का विवरण:
इस गरिमामयी गोष्ठी की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकारा डॉ०गीता विश्वकर्मा “नेह’ने की। कार्यक्रम में आ०ममता बनर्जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रही, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ०सत्यभामा सिंह (बाबू शोभनाथ मंच की सचिव) ने अपनी उपस्थिति से मंच की शोभा बढ़ाई।
मंचीय संचालक व साहित्यकार आ०कामेश्वर सिंह’कामेश’ जी ने सभी अतिथि व रचनाकारों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती-वंदना हेतु ज्योति वर्मा जी को आमंत्रित किया और ज्योति वर्मा ने सुमधुर कंठ से ‘सरस्वती- वंदना’की। तत्पश्चात काव्य- पाठ का सिलसिला शुरू हुआ:
विशिष्ट अतिथि ममता बनर्जी ‘मंजरी’ ने अपने सुमधुर गीत “पपीहा छेड़ रहा मधुर-मधुर तान रे” से वातावरण को संगीतमय कर दिया।
मुख्य अतिथि आ० सत्यभामा सिंह ने उत्कृष्ट ‘सवैया’ छंद का पाठ कर अपनी विद्वत्ता का परिचय दिया।
डॉ. दिवाकर पाठक ने अपनी ओजपूर्ण कविता से ऊर्जा भरी, तो ज्योति वर्मा ने “मैं कविता हूँ” के माध्यम से कविता के अस्तित्व को परिभाषित किया।
सोनी बरनवाल ने “रस्ते-रस्ते में प्यार बिछा दें यह साल” के जरिए सद्भावना का संदेश दिया।
डॉ. विजय लक्ष्मी ने “बूढ़ी काकी” शीर्षक से मर्मस्पर्शी प्रस्तुति दी, वहीं किरण देवी ने “स्त्री का सम्मान” विषय पर अपनी बात रखी।
ज्योति बरनवाल ने “ये धरती रहे सदा आबाद” और अंजलि बरनवाल ने “रोज संवारती मुझको माँ” जैसी भावुक कविताओं से सबका मन मोह लिया, ओमप्रकाश जी ने अध्यात्मिक रचना रखी, तो अंकित उपाध्याय ने समाजिक, अलग अंदाज़ में कवियत्री
सविता धर ने “ऋतुराज वसंत” का वर्णन किया, तो संपत्ति चौरे ने गज़ल से मंच सजाया।संचालक कामेश्वर सिंह ‘कामेश’ ने “तुझको आँखों में बसाना चाहता हूँ” की तान से पटल को सजाया।
संयोजिका व अध्यक्ष पूर्णिमा सुमन ने ‘मधुमास’ पर शानदार ‘कुंडलियाँ छंद’ का पाठ करते हुए, नारी शक्ति पर कविता पढ़ा।
अध्यक्षीय उद्बोधन एवं समीक्षा:
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष डॉ. गीता विश्वकर्मा ‘नेह’ ने सभी रचनाओं की सूक्ष्म एवं सुंदर समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक रचनाकार के भावों की सराहना करते हुए अपनी रचना भी प्रस्तुत की, जिसने गोष्ठी में चार चाँद लगा दिए।
समापन अध्यक्ष पूर्णिमा सुमन जी ने अतिथिगण व सम्मलित साहित्यकारों का आभार व्यक्त करते हुए किया।




